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गुरुवार, 18 अक्टूबर 2007

शायद तुम भी

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी
बिखरा नहीं
कुछ बंधा नहीं
समय ठहरा था
लेकिन पृथ्वी नहीं
और मैं गुजर रहा था तुम्हारे साथ शाम के बसेरे से
और शायद तुम भी

ठहराव के पल
जिंदगी जितने खूबसूरत
उमस का मौसम
बारिशों सा हसीन
और मैं गुजर रहा था तुम्हारे साथ शाम के बसेरे से
और शायद तुम भी

स्पर्श का रोमांच
ध्वनि जैसा स्पंदित
स्पर्श का रोमांच
आकाश जितना अंतहीन
और मैं गुजर रहा था तुम्हारे साथ शाम के बसेरे से
और शायद तुम भी

कविता

अपनी दुनिया को दूर से देखना
उन जिए पलों की तहों में उतरना
उनसे बाहर निकलना
उन पलों को जीना जो अब तक अनजिए रहे
यानी अनजिए के पल
जिए का तो कोई अगला पल होता नहीं

सोमवार, 8 अक्टूबर 2007

मार्केट लुढ़का

आज स्टाक मार्केट में जबरदस्त गिरावट है। जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां बन रही हैं, लगता है कि मार्केट अभी और नीचे जाएगा। इसलिए यह खरीदी का अच्छा समय है लेकिन इंतजार करना चाहिए १७००० से नीचे जाने का।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2007

अशोक वाजपेयी की एक कविता

जितना मैं सड़क के बीहड़पन
बत्तियों के ऊपर के अँधेरे
पेड़ के झुकाव और बादल के रंग को
स्वीकार कर लेता हूँ-
उतना, सिर्फ उतना तुम्हे अपना प्यार देता हूँ।
-अशोक वाजपेयी

यह पूरी ही नहीं हो पाई

जिनसे मोहब्बत नहीं होती
उनके साथ सफ़र बहुत सीधा और आसान होता है
भले ही रास्ता पहाड़ी हो
भले ही बारिशों ने उसे रपटीला बना दिया हो
भले एक छाते में ही सिर क्यों न छिपाएं हों
कोई फर्क नही पडता.

कच्चे बादाम का स्वाद
कच्चे अखरोट को हाथ पर घिसने का मजा
बारिश मे टपकते ढाबे मे खाने का सुख...

यह कविता मैने नहीं लिखी

तेरी मोहब्बत में यारा, लुत्फ़ है इबादत का,
कुदरत की जुबां बोलता है, मजमून तेरे ख़त का.

मस्त सबा के झोंके लिपट गए जो मुझसे,
प्रेम की गर्म बूंदे झड़ गईं फलक से,
छोटा-बड़ा इशारा समूची कायनात का,
दे गया पैगाम पिया तेरी मोहब्बत का.

तेरी मोहब्बत में यारा, लुत्फ़ है इबादत का,
कुदरत की जुबां बोलता है, मजमून तेरे ख़त का

मैं चाहता हूं

मैं चाहता हूं
तुम्हारे साथ किसी ऊंचे पहाड़ से चिल्लाऊं
मैं चाहता हूं
तुम्हारे साथ जंगल एक्सप्लोर करूं
मैं चाहता हूं
तुम्हारे साथ नदी किनारे बैठ पानी का गीत सुनूं
मैं चाहता हूं
तुम्हारे साथ खिलते फूलों को देखूं
आकाश के तारे गिनूं
और अपना एक तारा बनाऊं जिसे हर रात हम-तुम साथ-साथ खोजें
मैं यह कुछ भी नहीं करता
क्योंकि तुम मेरे बाजू में नहीं हो
चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ीPromote Your Blog
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