Google

बुधवार, 28 नवंबर 2007

चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती

त्रिलोचन जी ने बनारस में एक बार यह कविता सुनाई थी और तब से यह कविता भूली नहीं। लेकिन बाबा इससे भी ज्यादा मगन होकर निराला की कविता राम की शक्ति पूजा सुनाते हैं।

चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती

मैं जब पढ़ने लगता हूँ वह आ जाती है
खड़ी खड़ी चुपचाप सुना करती है
उसे बड़ा अचरज होता है:
इन काले चिन्हों से
कैसे ये सब स्वर निकला करते हैं.
चम्पा सुन्दर की लड़की है
सुन्दर ग्वाला है : गाय भैसे रखता है
चम्पा चौपायों को लेकर
चरवाही करने जाती है
चम्पा अच्छी है चंचल है

न ट ख ट भी है
कभी कभी ऊधम करती है
कभी कभी वह कलम चुरा देती है
जैसे तैसे उसे ढूंढ कर जब लाता हूँ
पाता हूँ - अब कागज गायब
परेशान फिर हो जाता हूँ
चम्पा कहती है:
तुम कागद ही गोदा करते हो दिन भर
क्या यह काम बहुत अच्छा है
यह सुनकर मैं हँस देता हूँ
फिर चम्पा चुप हो जाती है

उस दिन चम्पा आई , मैने कहा कि
चम्पा, तुम भी पढ़ लो
हारे गाढ़े काम सरेगा
गांधी बाबा की इच्छा है -
सब जन पढ़ना लिखना सीखें

चम्पा ने यह कहा कि
मैं तो नहीं पढ़ूंगी तुम तो कहते थे
गांधी बाबा अच्छे हैं
वे पढ़ने लिखने की कैसे बात कहेंगे
मैं तो नहीं पढ़ूंगी
मैने कहा चम्पा, पढ़ लेना अच्छा है
ब्याह तुम्हारा होगा , तुम गौने जाओगी,
कुछ दिन बालम सँग साथ रह चला जायेगा जब कलकत्ता
बड़ी दूर है वह कलकत्ता
कैसे उसे सँदेसा दोगी
कैसे उसके पत्र पढ़ोगी
चम्पा पढ़ लेना अच्छा है!
चम्पा बोली : तुम कितने झूठे हो ,
देखा ,हाय राम , तुम पढ़-लिख कर इतने झूठे हो
मैं तो ब्याह कभी न करुंगी
और कहीं जो ब्याह हो गया
तो मैं अपने बालम को संग साथ रखूंगी
कलकत्ता मैं कभी न जाने दूंगी

कलकत्ता पर बजर गिरे।

मोहब्बतें - उनकी मोहब्बत बढ़ी और दुनिया से खुशी कम होती रही

मंगलवार, 27 नवंबर 2007

सर्वे रिजल्ट - क्या समाजवाद-जनवाद आम जनता को गरिया कर आएगा (फिलहाल अंतिम किस्त)

क्या समाजवाद-जनवाद आम जनता को गाली देकर आएगा-
19 लोगों ने वोट डाले।
13 ने कहा - कतई नहीं
6 ने कहा - हां

6 लोग जिन्होंने हां कहा, वे वह होंगे जो यह मानते हैं कि समाजवाद-जनवाद प्रतिक्रियावादी बनने से नहीं, क्रियावादी बनने से ही आ सकता है और चिढ़कर उनने हां पर क्लिक किया होगा।
बाकी 19 के बारे में निश्चित तौर पर कुछ कह नहीं सकता।

रविवार, 25 नवंबर 2007

त्रिलोचन का अपमान मत करो यारों-4

मैने त्रिलोचन का अपमान मत करो यारों-2 में उनकी रचनाओं की रायल्टी को लेकर बात की थी। किन्हीं बेनामी जी ने आज उस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी में जो जानकारी दी, वह वाकई बहुत निराशाजनक है। लेकिन बेनामी जी ने जो तल्ख भाषा अनुनाद सिंह जी के लिए इस्तेमाल की, उससे लगता है कि वे भी उसी कथित जनवादी लिबरेशन वाले हैं जो अपने हीरोज का इस्तेमाल करना जानते हैं लेकिन उनके लिए लड़ना नहीं।
बेनामी ने कहा…
त्रिलोचन जी की समस्त रोयल्टी की राशि पान्च सौ रुपया सालाना है। अनुनाद सिन्ह जी, हिन्दी भाषा के महान लेखको की आर्थिक दशा को क्रिपया जानिये। आपका वक्तव्य किसी क्रूर असान्स्क्रितिक रईस का वक्तव्य लगता है।

मेरे मन में सवाल यह उठ रहा है कि राजकमल जैसे प्रकाशन बाबा जैसे लोगों को बेचकर करोड़ों कमा रहे हैं, इस शोषण के खिलाफ जनवादी कब लड़ाई लड़ेंगे। अपने शोषण के खिलाफ भी खड़े हुआ जाए। सिर्फ जनता को गरियाते रहने से काम नहीं चलने वाला।

क्या बाबा त्रिलोचन, बाबा नागार्जुन जैसे जनकवियों की रचनाओं से शोषक प्रकाशक ऐसे ही करोड़ों कमाते रहते दिया जाएगा। मान लीजिए हमारे जैसे भ्रष्ट और लालची (जनवादियों ने हमें इन्हीं विशेषणों से नवाजा है) लोग और कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम इस ब्लागजगत में तो एक कैंपेन चला सकते हैं, शायद कुछ असर हो और जनवादियों पर भी दबाव बने कि वे लोग ऐसे प्रकाशकों को छोड़ें (दिल्ली में जनवादियों की रोजीरोटी का अड्डा ये शोषक प्रकाशक भी हैं)।

शनिवार, 24 नवंबर 2007

एचपीसीएल शार्ट टर्म के लिए

275 से 280 के बीच सोमवार को एचपीसीएल पकड़ पाएं तो पकड़ लें। शुक्रवार को 330-335 पर निकाल दें।
एचएफसीएल भी 27 पर दो माह के लिए ले सकते हैं। टारगेट-40.

नोट- सो काल्ड जनवादी स्ट्रीट के लोगों के लिए भी यह स्ट्रीट खुली है।

शुक्रवार, 23 नवंबर 2007

नंदीग्राम का सच - कम्युनिस्ट बनाम कम्युनिस्ट

नक्सलबाड़ी आंदोलन के संस्थापक सदस्य कानू सान्याल ने एक टीवी इंटरव्यू में जो कहा, उससे यह बात साफ हो गई है कि नंदीग्राम एपीसोड में नक्सली लोगों का पूरा योगदान है। सान्याल ने कहा कि नक्सलबाड़ी में तो सिर्फ तीन महीने तक आंदोलन चला था, नंदीग्राम तो 11 महीने से चल रहा है और इसका प्रभाव नक्सलबाड़ी आंदोलन से ज्यादा होगा। मैने व मुझ जैसे अन्य नेताओं ने वहां बीज बो दिए हैं। प्रसिद्ध नक्सली कवि वरबर राव भी वहां से होकर आए हैं।

यानी ममता बनर्जी जबरदस्ती कूद रही हैं। लड़ाई तो कम्युनिस्ट बनाम कम्युनिस्ट चल रही है। कानू ने तो स्पष्ट कर दिया कि सत्ता के खिलाफ हथियार उठाना ही पड़ेगा। वरबर राव ने तो यहां तक कहा कि जहां-जहां देश में सेज के खिलाफ किसान खड़े होंगे, वहीं नंदीग्राम बना दिया जाएगा। माकपा ब्रांड कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्या ने कहा भी था कि माओवादियों का एक ग्रुप ट्रेनिंग ले रहा है। यह ट्रेनिंग झारखंड के रंजीत पाल के नेतृत्व में चल रही है। अब क्या बचा कहने को।
चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ीPromote Your Blog
Powered by WebRing.
Powered by WebRing.